श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.74.3 
किं नु तेऽदूषयद् रामो राजा वा भृशधार्मिक:।
ययोर्मृत्युर्विवासश्च त्वत्कृते तुल्यमागतौ॥ ३॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी ने अथवा उन परम पुण्यशाली महाराज (पिताजी) ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था, कि तुम्हारे कारण उन्हें वनवास और मृत्यु दोनों दुःख एक साथ भोगने पड़े?॥3॥
 
‘What wrong did Sri Ram or that extremely virtuous Maharaj (father) do to you, that he had to suffer the pain of exile and death simultaneously because of you?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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