श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.74.29 
एकपुत्रा च साध्वी च विवत्सेयं त्वया कृता।
तस्मात् त्वं सततं दु:खं प्रेत्य चेह च लप्स्यसे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'तुमने इकलौते पुत्र वाली पतिव्रता स्त्री कौशल्या को उसके पुत्र से अलग कर दिया है। इसलिए तुम इस लोक में और परलोक में भी सदैव दुःख भोगोगे।'
 
'You have separated Kausalya, a virtuous lady with an only son, from her son. Therefore, you will always experience sorrow in this world as well as the next.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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