श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.74.22 
शान्तं पापं न व: किंचित् कुतश्चिदमराधिप।
अहं तु मग्नौ शोचामि स्व पुत्रौ विषमे स्थितौ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'देवेश्वर! पाप शान्त हों। आपको कहीं से कोई संकट नहीं है। मैं अपने इन दोनों पुत्रों को कठिन परिस्थिति (गम्भीर संकट) में डूबा हुआ देखकर शोक कर रहा हूँ॥ 22॥
 
'Deveshwar! May the sins be pacified. There is no danger for you from anywhere. I am grieving seeing these two sons of mine immersed in a difficult situation (serious trouble).॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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