श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.74.20 
भयं कच्चिन्न चास्मासु कुतश्चिद् विद्यते महत्।
कुतोनिमित्त: शोकस्ते ब्रूहि सर्वहितैषिणि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे सबका कल्याण करने वाली देवी! क्या हम पर कहीं से कोई बड़ा भय आ पड़ा है? मुझे बताइए, आपके दुःख का कारण क्या है?॥ 20॥
 
'O Goddess who wishes well for all! Has some great fear befallen us from somewhere? Tell me, what is the reason for your grief?॥ 20॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd