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श्लोक 2.74.14  |
अङ्गप्रत्यङ्गज: पुत्रो हृदयाच्चाभिजायते।
तस्मात् प्रियतरो मातु: प्रिया एव तु बान्धवा:॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| पुत्र माता के अंग और हृदय से उत्पन्न होता है, इसलिए वह माता को अधिक प्रिय होता है। अन्य भाई और सम्बन्धी तो प्रिय होते ही हैं (परन्तु पुत्र अधिक प्रिय होता है)॥14॥ |
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| ‘A son is born from the body parts and heart of the mother, hence he is more dear to the mother. Other brothers and relatives are only dear (but the son is dearer). 14॥ |
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