श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.74.13 
किं नावबुध्यसे क्रूरे नियतं बन्धुसंश्रयम्।
ज्येष्ठं पितृसमं रामं कौसल्यायात्मसम्भवम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'क्रूरहृदय! कौसल्यापुत्र श्री राम मेरे बड़े भाई और पिता के समान हैं। वे संयमी और स्वजनों के रक्षक हैं। क्या तुम उन्हें इस रूप में नहीं जानते?॥13॥
 
'Cruel-hearted one! Kausalya's son Shri Ram is like my elder brother and father. He is self-controlled and the protector of his relatives. Don't you know him in this form?॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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