श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.74.12 
कौसल्यां धर्मसंयुक्तां वियुक्तां पापनिश्चये।
कृत्वा कं प्राप्स्यसे ह्यद्य लोकं निरयगामिनि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पापमय विचारों वाली नरकगामी स्त्री कैकेयी! तू पतिव्रता माता कौशल्या को पति और पुत्र से वंचित करके किस लोक में जाएगी? 12॥
 
‘Kaikei, a hell-born woman with sinful thoughts! Which world will you go to after depriving the pious mother Kausalya of her husband and son? 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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