श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.73.8 
कौसल्या च सुमित्रा च पुत्रशोकाभिपीडिते।
दुष्करं यदि जीवेतां प्राप्य त्वां जननीं मम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे कैकेयी, जो मेरी माता कहलाती हैं, आपको पाकर कौशल्या और सुमित्रा भी अपने पुत्रों को खोने के शोक से पीड़ित हो गई हैं। अब उनका जीवित रहना बहुत कठिन है।॥8॥
 
'Kausalya and Sumitra too are afflicted with the grief of losing their sons after finding you, Kaikeyi, who is called my mother. Now it is very difficult for them to survive.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)