श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.73.27 
निवर्तयित्वा रामं च तस्याहं दीप्ततेजस:।
दासभूतो भविष्यामि सुस्थितेनान्तरात्मना॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राम को वापस लाकर मैं उसी तेजस्वी महापुरुष का सेवक बनूँगा और स्वस्थ मन से अपना जीवन व्यतीत करूँगा।॥27॥
 
Having brought back Rama, I will become the servant of that same great man of radiant glory and spend my life with a healthy mind.'॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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