श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.73.22 
सततं राजपुत्रेषु ज्येष्ठो राजाभिषिच्यते।
राज्ञामेतत् समं तत् स्यादिक्ष्वाकूणां विशेषत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘राजकुमारों में सबसे ज्येष्ठ को ही राजा बनाया जाता है। इस नियम का पालन सभी राजा समान रूप से करते हैं। इक्ष्वाकुवंश के राजाओं के कुल में इसका विशेष आदर किया जाता है।॥ 22॥
 
‘The eldest among the princes is always anointed as the king. This rule is followed equally by all the kings. It is specially respected in the clan of the kings of the Ikshvaku dynasty.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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