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श्लोक 2.73.18  |
न मे विकांक्षा जायेत त्यक्तुं त्वां पापनिश्चयाम्।
यदि रामस्य नावेक्षा त्वयि स्यान्मातृवत् सदा॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| यदि भगवान् राम तुम्हें सदैव अपनी माता न मानते, तो मुझे तुम्हारे समान पापमय विचार वाली माता का परित्याग करने में तनिक भी संकोच न होता॥18॥ |
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| Had Lord Rama not always looked upon you as his mother, I would have had no hesitation in abandoning a mother like you who has sinful thoughts.॥ 18॥ |
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