श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.73.14 
अहं हि पुरुषव्याघ्रावपश्यन् रामलक्ष्मणौ।
केन शक्तिप्रभावेण राज्यं रक्षितुमुत्सहे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'मैं नरसिंह श्री राम और लक्ष्मण को न देखकर किस बल से इस राज्य की रक्षा कर सकता हूँ? (मेरा बल तो मेरे भाई ही हैं।)॥14॥
 
'With what power can I, the lion of men, protect this kingdom, not seeing Shri Ram and Lakshmana? (My strength is my brothers only.)॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)