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ramayan 2.73.1: पिता की मृत्यु और दोनों भाइयों के वनवास का समाचार सुनकर भरत अत्यन्त दुःखी हुए और इस प्रकार बोले-॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.73.1 
श्रुत्वा च स पितुर्वृत्तं भ्रातरौ च विवासितौ।
भरतो दु:खसंतप्त इदं वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
पिता की मृत्यु और दोनों भाइयों के वनवास का समाचार सुनकर भरत अत्यन्त दुःखी हुए और इस प्रकार बोले-॥1॥
 
On hearing the news of the death of his father and the exile of his two brothers, Bharata became very sad and spoke thus:॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)