Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.71.5: तत्पश्चात् पश्चिमी सरस्वती और गंगा की विशेष धाराओं के संगम से होते हुए वे वीरमत्स्य देश के परवर्ती देशों में प्रविष्ट हुए और वहाँ से आगे बढ़कर भारुण्डवन के भीतर चले गए॥5॥ | ramayan सर्ग 2.71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सरस्वतीं च गङ्गां च युग्मेन प्रतिपद्य च।
उत्तरान् वीरमत्स्यानां भारुण्डं प्राविशद् वनम्॥ ५॥
अनुवाद
तत्पश्चात् पश्चिमी सरस्वती और गंगा की विशेष धाराओं के संगम से होते हुए वे वीरमत्स्य देश के परवर्ती देशों में प्रविष्ट हुए और वहाँ से आगे बढ़कर भारुण्डवन के भीतर चले गए॥5॥
After that, passing through the confluence of western Saraswati and special streams of Ganga, he entered the later countries of Veermatsya country and from there onwards he went inside Bharundvan. 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥