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ramayan 2.71.40-42h: मूर्तिपूजा बंद हो गई है। यज्ञवेदियों पर यज्ञ नहीं हो रहे हैं। फूल-मालाओं के बाजार में आज कोई वस्तु नहीं बिक रही है। व्यापारी भी पहले जैसे नहीं दिखाई दे रहे हैं। उनके हृदय चिन्ता से व्याकुल हैं और वे अपने व्यापार के नष्ट हो जाने से उदास हैं।॥40-41 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश  »  श्लोक 40-42h
 
 
श्लोक  2.71.40-42h 
देवतार्चा: प्रविद्धाश्च यज्ञगोष्ठास्तथैव च॥ ४०॥
माल्यापणेषु राजन्ते नाद्य पण्यानि वा तथा।
दृश्यन्ते वणिजोऽप्यद्य न यथापूर्वमत्र वै॥ ४१॥
ध्यानसंविग्नहृदया नष्टव्यापारयन्त्रिता:।
 
 
अनुवाद
मूर्तिपूजा बंद हो गई है। यज्ञवेदियों पर यज्ञ नहीं हो रहे हैं। फूल-मालाओं के बाजार में आज कोई वस्तु नहीं बिक रही है। व्यापारी भी पहले जैसे नहीं दिखाई दे रहे हैं। उनके हृदय चिन्ता से व्याकुल हैं और वे अपने व्यापार के नष्ट हो जाने से उदास हैं।॥40-41 1/2॥
 
‘The worship of idols has stopped. Yagyas are not being performed in the sacrificial altars. There are no items to be sold in the flower and garland market today. The traders are also not seen here as they used to be. Their hearts seem to be agitated with worry and they are feeling dejected due to the destruction of their business.॥ 40-41 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)