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ramayan 2.71.30: 'मैं अनेक प्रकार के अशुभ, क्रूर और अशुभ शकुन देख रहा हूँ, जिनसे मेरा मन दुःखी हो रहा है।॥30॥   |   ramayan सर्ग 2.71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.71.30 
अनिष्टानि च पापानि पश्यामि विविधानि च।
निमित्तान्यमनोज्ञानि तेन सीदति मे मन:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'मैं अनेक प्रकार के अशुभ, क्रूर और अशुभ शकुन देख रहा हूँ, जिनसे मेरा मन दुःखी हो रहा है।॥30॥
 
'I am seeing many kinds of evil, cruel and ominous omens, which are making my mind sad.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)