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ramayan 2.71.14-15: तत्पश्चात् सर्वतीर्थ नामक ग्राम में एक रात्रि निवास करके, नाना प्रकार के पर्वतीय घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर, उत्तानिका आदि नदियों को पार करते हुए, महाबली भरतजी हस्तिप्रथक नामक ग्राम में पहुँचे। वहाँ से आगे जाकर उन्होंने कुटिका नदी पार की। फिर लोहित्य नामक ग्राम में पहुँचकर कपिवती नामक नदी को पार किया। 14-15॥   |   ramayan सर्ग 2.71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 71: रथ और सेना सहित भरत की यात्रा, अयोध्या की दुरवस्था देखते हुए सारथि से अपना दुःखपूर्ण उद्गार प्रकट करते हुए राजभवन में प्रवेश  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  2.71.14-15 
वासं कृत्वा सर्वतीर्थे तीर्त्वा चोत्तानिकां नदीम्।
अन्या नदीश्च विविधै: पार्वतीयैस्तुरङ्गमै:॥ १४॥
हस्तिपृष्ठकमासाद्य कुटिकामप्यवर्तत।
ततार च नरव्याघ्रो लोहित्ये च कपीवतीम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सर्वतीर्थ नामक ग्राम में एक रात्रि निवास करके, नाना प्रकार के पर्वतीय घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर, उत्तानिका आदि नदियों को पार करते हुए, महाबली भरतजी हस्तिप्रथक नामक ग्राम में पहुँचे। वहाँ से आगे जाकर उन्होंने कुटिका नदी पार की। फिर लोहित्य नामक ग्राम में पहुँचकर कपिवती नामक नदी को पार किया। 14-15॥
 
After that, after staying for one night in a village named Sarvatirtha, crossing the river Uttanika and other rivers in a chariot harnessed by different types of mountain horses, the great Bharatji reached the village named Hastiprathak. Going further from there, they crossed the Kutika river. Then after reaching a village named Lohitya, crossed the river named Kapivati. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)