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ramayan 2.70.27: मार्ग पार करके श्रीमान् भरत ने राजमहल के अत्यंत सुन्दर आंतरिक कक्ष को देखा और बिना किसी बाधा के उसमें प्रवेश कर गए॥27॥   |   ramayan सर्ग 2.70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.70.27 
अभ्यतीत्य ततोऽपश्यदन्त:पुरमनुत्तमम्।
ततस्तद् भरत: श्रीमानाविवेशानिवारित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मार्ग पार करके श्रीमान् भरत ने राजमहल के अत्यंत सुन्दर आंतरिक कक्ष को देखा और बिना किसी बाधा के उसमें प्रवेश कर गए॥27॥
 
After crossing the road, Shriman Bharata saw the most exquisite inner chamber of the royal palace and entered it without any hindrance.॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)