पुरोहितं च कुशलं ये चान्ये द्विजसत्तमा:।
तौ च तात महेष्वासौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥ १८॥
अनुवाद
‘पिताजी! आप अपने पुरोहित तथा अन्य श्रेष्ठ ब्राह्मणों को मेरा कुशल-क्षेम बताइए। साथ ही उन दोनों महाधनुर्धर श्री राम और लक्ष्मण को भी कुशल-क्षेम का समाचार सुनाइए।’॥18॥
‘Father! Inform your priest and other great Brahmins about my well-being. Also convey the news of well-being here to those two great archers, Shri Ram and Lakshman.’॥ 18॥