श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.70.16 
भरतेनैवमुक्तस्तु नृपो मातामहस्तदा।
तमुवाच शुभं वाक्यं शिरस्याघ्राय राघवम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भरत के ऐसा कहने पर नाना केकयनरणेश ने रघुकुल के रत्न भरत का मस्तक सूंघकर ये शुभ वचन कहे-॥16॥
 
On Bharata saying this, Nana Kekayanareshan smelled the head of Bharata, the jewel of the Raghukul, and said these auspicious words -॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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