Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.70.12: 'मानसिंह! जिनका कल्याण तुम चाहते हो, वे कल्याणी हैं। देवी लक्ष्मी (शोभा) हाथ में कमल धारण करके तुम्हारा स्वागत कर रही हैं। अब तुम्हारा रथ शीघ्र ही यात्रा के लिए तैयार हो जाना चाहिए।'॥12॥   |   ramayan सर्ग 2.70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 70: दूतों का भरत को वसिष्ठजी का संदेश सुनाना, भरत का पिता आदि की कुशल पूछना, शत्रुघ्न के साथ अयोध्या की ओर प्रस्थान करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.70.12 
कुशलास्ते नरव्याघ्र येषां कुशलमिच्छसि।
श्रीश्च त्वां वृणुते पद्मा युज्यतां चापि ते रथ:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'मानसिंह! जिनका कल्याण तुम चाहते हो, वे कल्याणी हैं। देवी लक्ष्मी (शोभा) हाथ में कमल धारण करके तुम्हारा स्वागत कर रही हैं। अब तुम्हारा रथ शीघ्र ही यात्रा के लिए तैयार हो जाना चाहिए।'॥12॥
 
'Mansingh! Those whose well-being you seek are well. Goddess Lakshmi (Shobha) holding a lotus in her hand is welcoming you. Now your chariot should be ready for the journey soon.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)