| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना » श्लोक 8-9 |
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| | | | श्लोक 2.7.8-9  | उत्तमेनाभिसंयुक्ता हर्षेणार्थपरा सती।
राममाता धनं किं नु जनेभ्य: सम्प्रयच्छति॥ ८॥
अतिमात्रं प्रहर्ष: किं जनस्यास्य च शंस मे।
कारयिष्यति किं वापि सम्प्रहृष्टो महीपति:॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | 'दाई! श्री रामचन्द्र की माता आज हर्षित होकर, अपनी मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति के लिए तत्पर होकर, लोगों को धन क्यों बाँट रही हैं? आज यहाँ सब लोग इतने प्रसन्न क्यों हैं? इसका कारण बताओ! राजा दशरथ आज अत्यन्त प्रसन्न होकर कौन-सा कार्य करेंगे?'॥8-9॥ | | | | ‘Dai! Why is Shri Ramchandra's mother distributing wealth to people today, full of joy, being ready to fulfill some of her desired desires? Why are all the people here so happy today? Tell me the reason for this! What deed will King Dasharath perform today, being very happy?'॥ 8-9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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