श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.7.6 
हृष्टप्रमुदितै: पौरैरुच्छ्रितध्वजमालिनीम्।
अयोध्यां मन्थरा दृष्ट्वा परं विस्मयमागता॥ ६॥
 
 
अनुवाद
समस्त नगरवासी हर्ष और उल्लास से भरकर नगर में सर्वत्र ऊँची-ऊँची ध्वजाएँ फहरा रहे हैं। अयोध्या की ऐसी शोभा देखकर मंथरा को बड़ा आश्चर्य हुआ॥6॥
 
All the residents of the city are filled with joy and excitement and are hoisting high-altitude flags everywhere in the city. Manthara was very surprised to see such beauty of Ayodhya. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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