vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना
»
श्लोक 35
श्लोक
2.7.35
रामे वा भरते वाहं विशेषं नोपलक्षये।
तस्मात् तुष्टास्मि यद् राजा रामं राज्येऽभिषेक्ष्यति॥ ३५॥
अनुवाद
मैं भी राम और भरत में कोई भेद नहीं देखता, अतः यह जानकर कि राजा श्री राम का अभिषेक करने जा रहे हैं, मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ॥ 35॥
‘I too do not see any difference between Rama and Bharata. Therefore, knowing that the king is going to anoint Shri Ram, I am very happy.॥ 35॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas