श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.7.24 
धर्मवादी शठो भर्ता श्लक्ष्णवादी च दारुण:।
शुद्धभावेन जानीषे तेनैवमतिसंधिता॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा स्वामी धर्म की बातें तो बहुत करता है, परन्तु वह बड़ा बेईमान है। वह मुँह से तो मीठी बातें करता है, परन्तु हृदय से बड़ा क्रूर है। तुम सोचते हो कि वह शुद्ध भाव से ये सब बातें कहता है, इसीलिए आज तुम उसके द्वारा ठगे गए हो॥ 24॥
 
‘Your master talks a lot about religion, but he is very dishonest. He talks sweetly with his mouth, but is very cruel at heart. You think that he says all these things with pure intentions, that is why today you have been cheated by him.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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