श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.7.23 
नराधिपकुले जाता महिषी त्वं महीपते:।
उग्रत्वं राजधर्माणां कथं देवि न बुध्यसे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'देवी! आप राजाओं के कुल में उत्पन्न हुई हैं और महाराजा की रानी हैं, फिर भी आप राज-कर्म की गंभीरता को क्यों नहीं समझ पातीं?॥ 23॥
 
‘Goddess! You were born in a family of kings and are the queen of a Maharaja, yet how come you are not able to understand the severity of the royal duties?॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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