श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.7.20 
अक्षयं सुमहद् देवि प्रवृत्तं त्वद्विनाशनम्।
रामं दशरथो राजा यौवराज्येऽभिषेक्ष्यति॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'देवी! आपके सौभाग्य का महाविनाश करने वाला कार्य प्रारम्भ हो चुका है, जिसका कोई तोड़ नहीं है। कल राजा दशरथ श्री राम का युवराज पद पर अभिषेक करेंगे।'
 
‘Devi! The work of great destruction of your good fortune has begun, for which there is no counter. Tomorrow King Dasharath will anoint Shri Ram as the crown prince.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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