|
| |
| |
श्लोक 2.7.17  |
कैकेयी त्वब्रवीत् कुब्जां कच्चित् क्षेमं न मन्थरे।
विषण्णवदनां हि त्वां लक्षये भृशदु:खिताम्॥ १७॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| उस समय राजकुमारी केकय ने कुब्जा से पूछा - 'मंथरा ! क्या कोई अनहोनी घटित हुई है ? क्योंकि तुम्हारा मुखमंडल विषाद से भरा हुआ है और तुम मुझे अत्यन्त दुःखी दिखाई दे रही हो ॥ 17॥ |
| |
| At that time princess Kekaya asked Kubja - 'Manthra! Has anything untoward happened? Because your face is filled with gloom and you appear very sad to me.'॥ 17॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|