श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.7.16 
एवमुक्ता तु कैकेयी रुष्टया परुषं वच:।
कुब्जया पापदर्शिन्या विषादमगमत् परम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब क्रोध में भरी हुई और अच्छी बातों में भी बुराई दिखाने वाली कुब्जा ने ऐसे कठोर वचन कहे, तब कैकेयी को बड़ा दुःख हुआ ॥16॥
 
Kaikeyi felt very sad when Kubja, who was full of anger and was showing evil even in good things, said such harsh words. ॥16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas