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ramayan 2.7.1: रानी कैकेयी की एक दासी थी जो अपने मायके से आई थी। वह सदैव कैकेयी के साथ रहती थी। उसका जन्म कहाँ हुआ था? उसका देश कौन था और उसके माता-पिता कौन थे? यह कोई नहीं जानता था। राज्याभिषेक से एक दिन पहले, वह स्वेच्छा से कैकेयी के चन्द्रमा के समान चमकते महल की छत पर चढ़ गई।॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 7: मन्थरा का कैकेयी को उभाड़ना, कैकेयी का उसे पुरस्कार में आभूषण देना और वर माँगने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.7.1 
ज्ञातिदासी यतो जाता कैकेय्या तु सहोषिता।
प्रासादं चन्द्रसंकाशमारुरोह यदृच्छया॥ १॥
 
 
अनुवाद
रानी कैकेयी की एक दासी थी जो अपने मायके से आई थी। वह सदैव कैकेयी के साथ रहती थी। उसका जन्म कहाँ हुआ था? उसका देश कौन था और उसके माता-पिता कौन थे? यह कोई नहीं जानता था। राज्याभिषेक से एक दिन पहले, वह स्वेच्छा से कैकेयी के चन्द्रमा के समान चमकते महल की छत पर चढ़ गई।॥1॥
 
Queen Kaikeyi had a maid who had come from her maternal home. She always stayed with Kaikeyi. Where was she born? Who was her country and who were her parents? No one knew this. One day before the coronation, she voluntarily climbed up to the roof of Kaikeyi's moon-like shining palace.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)