श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.67.9 
नाराजके जनपदे विद्युन्माली महास्वन:।
अभिवर्षति पर्जन्यो महीं दिव्येन वारिणा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'जिस प्रदेश में राजा नहीं होता, वहाँ बिजली की मालाओं से सुशोभित गरजने वाले मेघ भी पृथ्वी पर दिव्य जल नहीं बरसाते॥9॥
 
'In a region where there is no king, the loud thundering clouds decorated with garlands of lightning do not rain celestial water on the earth.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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