श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.67.8 
इक्ष्वाकूणामिहाद्यैव कश्चिद् राजा विधीयताम्।
अराजकं हि नो राष्ट्रं विनाशं समवाप्नुयात्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'इक्ष्वाकु वंश के किसी राजकुमार को आज ही यहाँ का राजा बना देना चाहिए; क्योंकि राजा के बिना हमारा राज्य नष्ट हो जाएगा।
 
'One of the princes of the Ikshvaku dynasty should be made the king here today itself; because without a king our kingdom would be destroyed.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas