श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.67.7 
उभौ भरतशत्रुघ्नौ केकयेषु परंतपौ।
पुरे राजगृहे रम्ये मातामहनिवेशने॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'शत्रुओं को कष्ट देने वाले दोनों भाई भरत और शत्रुघ्न केकय देश के सुन्दर महल में अपने नाना के घर रहते हैं।
 
'The two brothers Bharata and Shatrughna, who torment the enemies, live in the house of their maternal grandfather in the beautiful palace of Kekaya country.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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