श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.67.5 
अतीता शर्वरी दु:खं या नो वर्षशतोपमा।
अस्मिन् पञ्चत्वमापन्ने पुत्रशोकेन पार्थिवे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "अपने बेटे की मौत के गम में यह रात बड़े दुख के साथ बीती है। हमें तो यह सौ साल जैसी लग रही थी।"
 
He said, 'This night has passed with great sorrow due to the grief of the death of his son. It seemed like a hundred years to us.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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