श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.67.36 
अहो तम इवेदं स्यान्न प्रज्ञायेत किंचन।
राजा चेन्न भवेल्लोके विभजन् साध्वसाधुनी॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
यदि इस संसार में अच्छे-बुरे का भेद बतानेवाला कोई राजा न हो, तो सारा संसार अंधकार से आच्छादित हो जाए और कुछ भी दिखाई न दे ॥ 36॥
 
‘If there were no King in this world to differentiate between good and bad, then the entire world would be enveloped in darkness and one would not be able to see anything. ॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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