श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.67.34 
राजा सत्यं च धर्मश्च राजा कुलवतां कुलम्।
राजा माता पिता चैव राजा हितकरो नृणाम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
राजा सत्य और धर्म है। राजा श्रेष्ठ प्रजा का कुल है। राजा माता और पिता है तथा प्रजा का हित करने वाला राजा है॥ 34॥
 
‘The king is truth and religion. The king is the family of the noble people. The king is the mother and father and the king is the one who does good to the people.॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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