श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.67.29 
यथा ह्यनुदका नद्यो यथा वाप्यतृणं वनम्।
अगोपाला यथा गावस्तथा राष्ट्रमराजकम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जैसे जल के बिना नदियाँ, घास के बिना वन और ग्वाल-बालों के बिना गायें सुन्दर नहीं होतीं, वैसे ही राजा के बिना राज्य सुन्दर नहीं होता॥ 29॥
 
‘Just as rivers without water, forests without grass and cows without cowherds are not beautiful, similarly a kingdom is not beautiful without a king.॥ 29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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