श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.67.28 
नाराजके जनपदे चन्दनागुरुरूषिता:।
राजपुत्रा विराजन्ते वसन्ते इव शाखिन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'जिस प्रदेश में राजा नहीं होता, वहाँ चंदन और अगुरु लेप से लिपटे हुए राजकुमार वसन्त ऋतु में खिले हुए वृक्षों के समान शोभायमान नहीं होते॥ 28॥
 
'In a region where there is no king, the princes smeared with sandalwood and aguru paste do not look as beautiful as the trees in full bloom in the spring.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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