श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.67.27 
नाराजके जनपदे माल्यमोदकदक्षिणा:।
देवताभ्यर्चनार्थाय कल्प्यन्ते नियतैर्जनै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'जिस प्रदेश में अराजकता व्याप्त है, वहाँ मन को वश में रखने वाले पुरुष देवताओं की पूजा के लिए पुष्प, मिष्ठान और नैवेद्य की व्यवस्था नहीं करते।॥27॥
 
'In a region where anarchy prevails, those who have controlled their minds do not arrange for flowers, sweets and offerings for the worship of the gods.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas