श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.67.26 
नाराजके जनपदे नरा: शास्त्रविशारदा:।
संवदन्तोपतिष्ठन्ते वनेषूपवनेषु वा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजाविहीन राज्य में विद्वान लोग वनों और उद्यानों में रहकर शास्त्रों की व्याख्या नहीं कर सकते।
 
In a kingdom without a king, the learned men cannot stay in the forests and gardens explaining the scriptures.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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