श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.67.24 
नाराजके जनपदे योगक्षेम: प्रवर्तते।
न चाप्यराजके सेना शत्रून् विषहते युधि॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘अराजक देश में प्रजा जो प्राप्त नहीं कर पाती, उसे प्राप्त नहीं कर पाती और जो प्राप्त है, उसकी रक्षा नहीं कर पाती। राजा के अभाव में सेना भी युद्ध में शत्रुओं का सामना नहीं कर पाती। 24॥
 
‘In an anarchic country, people are not able to attain what they have not achieved and cannot protect what they have achieved. In the absence of the king, even the army does not face the enemies in war. 24॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas