श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.67.12 
नाराजके जनपदे कारयन्ति सभां नरा:।
उद्यानानि च रम्याणि हृष्टा: पुण्यगृहाणि च॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजाविहीन राज्य में लोग पंचायत भवन नहीं बनाते, सुन्दर उद्यान नहीं बनाते और हर्ष और उत्साह से तीर्थस्थान (धर्मशाला, मंदिर आदि) नहीं बनाते॥12॥
 
‘In a kingdom without a king, people do not build Panchayat buildings, do not construct beautiful gardens and do not build holy places (Dharamshalas, temples etc.) with joy and enthusiasm.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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