श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.67.11 
अराजके धनं नास्ति नास्ति भार्याप्यराजके।
इदमत्याहितं चान्यत् कुत: सत्यमराजके॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजाविहीन देश में धन भी अपना नहीं रहता। राजाविहीन राज्य में स्त्री भी अपनी नहीं रह सकती। राजाविहीन देश में यह महान भय बना रहता है। (जब पति-पत्नी आदि में सत्य सम्बन्ध नहीं रह सकता) तो अन्य सत्य कैसे रह सकता है?॥11॥
 
‘In a country without a king, wealth is not one's own. In a kingdom without a king, even a wife cannot remain one's own. This great fear remains in a country without a king. (When there cannot be a true relationship between husband and wife, etc.) then how can any other truth remain?॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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