श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 67: मार्कण्डेय आदि मुनियों तथा मन्त्रियों का राजा के बिना होने वाली देश की दुरवस्था का वर्णन करके वसिष्ठजी से किसी को राजा बनाने के लिये अनुरोध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.67.10 
नाराजके जनपदे बीजमुष्टि: प्रकीर्यते।
नाराजके पितु: पुत्रो भार्या वा वर्तते वशे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जिस देश में राजा नहीं होता, वहाँ खेतों में मुट्ठी भर बीज भी नहीं बोए जाते। जिस देश में राजा नहीं होता, वहाँ पुत्र पिता के वश में नहीं होते और स्त्रियाँ पति के वश में नहीं होतीं।॥10॥
 
‘In a region where there is no king, not even a handful of seeds are sown in the fields. In a country without a king, sons are not under the control of fathers and women are not under the control of husbands.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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