श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.66.9 
विदेहराजस्य सुता तथा चारुतपस्विनी।
दु:खस्यानुचिता दु:खं वने पर्युद्विजिष्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘विदेह राजकुमारी सीता, जिसने पति सेवा का सुन्दर तप किया है, दुःख भोगने के योग्य नहीं है। वह वन में दुःख भोगकर दुःखी हो जाएगी।॥9॥
 
‘Videha princess Sita, who has performed the beautiful penance of serving her husband, is not fit to suffer. She will become distressed after experiencing suffering in the forest.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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