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ramayan 2.66.6: 'जिस प्रकार लोभी मनुष्य दूसरों को विष दे देता है और उससे उत्पन्न होने वाले हत्या के पाप पर ध्यान नहीं देता, उसी प्रकार कैकेयी ने कुब्जा के कारण रघुवंशियों के इस कुल का नाश कर दिया।   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.66.6 
न लुब्धो बुध्यते दोषान् किंपाकमिव भक्षयन्।
कुब्जानिमित्तं कैकेय्या राघवाणां कुलं हतम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'जिस प्रकार लोभी मनुष्य दूसरों को विष दे देता है और उससे उत्पन्न होने वाले हत्या के पाप पर ध्यान नहीं देता, उसी प्रकार कैकेयी ने कुब्जा के कारण रघुवंशियों के इस कुल का नाश कर दिया।
 
‘Just as a greedy person gives poison to others and does not pay heed to the sins of the murder that result from it, in the same way Kaikeyi destroyed this clan of the Raghuvanshis because of Kubja.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)