Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.66.29: स्त्री-पुरुषों के समूह एक साथ खड़े होकर भरत और उनकी माता कैकेयी की निन्दा करने लगे। उस समय अयोध्यापुरी में रहने वाले सभी लोग महाराज की मृत्यु के कारण शोक में डूबे हुए थे। किसी को भी शांति नहीं मिल रही थी। | ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नराश्च नार्यश्च समेत्य संघशो
विगर्हमाणा भरतस्य मातरम्।
तदा नगर्यां नरदेवसंक्षये
बभूवुरार्ता न च शर्म लेभिरे॥ २९॥
अनुवाद
स्त्री-पुरुषों के समूह एक साथ खड़े होकर भरत और उनकी माता कैकेयी की निन्दा करने लगे। उस समय अयोध्यापुरी में रहने वाले सभी लोग महाराज की मृत्यु के कारण शोक में डूबे हुए थे। किसी को भी शांति नहीं मिल रही थी।
Groups of men and women stood together and started criticizing Bharata and his mother Kaikeyi. At that time, all the people living in Ayodhyapuri were grieving due to the death of Maharaja. No one could find peace.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षट्षष्टितम: सर्ग:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छाछठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥