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ramayan 2.66.26: राजा दशरथ शोक में स्वर्ग सिधार गए और उनकी रानियाँ शोक में भूमि पर लोटती रहीं। इसी शोक में सहसा सूर्य की किरणें फैलनी बंद हो गईं और सूर्यदेव अस्त हो गए। तत्पश्चात अंधकार छाने वाली रात्रि प्रकट हुई॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.66.26 
गते तु शोकात् त्रिदिवं नराधिपे
महीतलस्थासु नृपाङ्गनासु च।
निवृत्तचार: सहसा गतो रवि:
प्रवृत्तचारा रजनी ह्युपस्थिता॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ शोक में स्वर्ग सिधार गए और उनकी रानियाँ शोक में भूमि पर लोटती रहीं। इसी शोक में सहसा सूर्य की किरणें फैलनी बंद हो गईं और सूर्यदेव अस्त हो गए। तत्पश्चात अंधकार छाने वाली रात्रि प्रकट हुई॥ 26॥
 
King Dasharath went to heaven in grief and his queens kept rolling on the ground in grief. In this grief, suddenly the rays of the sun stopped spreading and the Sun God set. Thereafter night appeared spreading darkness.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)