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ramayan 2.66.25: नगर के सभी लोग आँसू बहा रहे थे। कुलीन स्त्रियाँ विलाप कर रही थीं। चौराहे और घरों के द्वार सूने लग रहे थे। (झाड़ू लगाना, लीपना और बलि चढ़ाना आदि कोई काम नहीं हो रहा था।) अतः नगर पहले जैसा सुन्दर नहीं लग रहा था।   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.66.25 
बाष्पपर्याकुलजना हाहाभूतकुलाङ्गना।
शून्यचत्वरवेश्मान्ता न बभ्राज यथापुरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
नगर के सभी लोग आँसू बहा रहे थे। कुलीन स्त्रियाँ विलाप कर रही थीं। चौराहे और घरों के द्वार सूने लग रहे थे। (झाड़ू लगाना, लीपना और बलि चढ़ाना आदि कोई काम नहीं हो रहा था।) अतः नगर पहले जैसा सुन्दर नहीं लग रहा था।
 
All the people of the city were shedding tears. The noble women were wailing. The crossroads and the doors of the houses appeared deserted. (There were no activities like sweeping, plastering and offering sacrifices etc.) Thus the city did not look as beautiful as before.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)