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ramayan 2.66.24: महान राजा दशरथ के बिना अयोध्या, तारों के बिना रात और पति के बिना स्त्री की तरह बेसहारा हो गई थी।   |   ramayan सर्ग 2.66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 66: राजा के लिये कौसल्या का विलाप और कैकेयी की भर्त्सना, मन्त्रियों का राजा के शव को तेल से भरे हुए कड़ाह में सुलाना, पुरी की श्रीहीनता और पुरवासियों का शोक  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.66.24 
निशा नक्षत्रहीनेव स्त्रीव भर्तृविवर्जिता।
पुरी नाराजतायोध्या हीना राज्ञा महात्मना॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महान राजा दशरथ के बिना अयोध्या, तारों के बिना रात और पति के बिना स्त्री की तरह बेसहारा हो गई थी।
 
Ayodhya, devoid of the great King Dasharatha, had become destitute like a night without stars and a woman without a husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)